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| टीईटी को लेकर विरोध करते शिक्षक - फोटो |
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के शिक्षण समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया है। राज्य के शिक्षण पदों पर भर्ती के लिए आवश्यक टीईटी (TET) योग्यता से जुड़े फैसले के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने सब “आउट वार” घोषित कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र राहत नहीं दी गई तो वे संयुक्त रूप से दिल्ली तक मार्च करेंगे।
📌 क्या है समस्या?
उत्तर प्रदेश में शिक्षण पदों पर नियुक्ति के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
हालांकि यह नियम पहले से मौजूद है, लेकिन इस बार शिक्षक संगठनों का कहना है कि:
✔️ ऐसा निर्णय सामान्य भर्ती और ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों के लिये असुविधाजनक है
✔️ कई अनुभवी शिक्षकों को TET पास करने का पर्याप्त समय नहीं मिला
✔️ प्रशासनिक प्रक्रिया में पहले से ही देरी है
इसलिए उन सभी ने इसे अन्यायपूर्ण और असमय निर्णय बताया है।
📣 शिक्षक संगठनों की चेतावनी
संघठन ने एक संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया कि:
📍 यदि सरकार तेजी से राहत पैकेज या संशोधित नीति लागू नहीं करती
→ तो वे दिल्ली तक peaceful march करेंगे
→ साथ ही चारों तरफ protest rallies भी आयोजित करेंगे
शिक्षकों का कहना है कि यह मार्च सिर्फ विरोध नहीं बल्कि न्याय की आवाज़ है।
उनका मानना है कि शिक्षण समुदाय के हितों को ध्यान में रख कर नीति में बदलाव होना चाहिए।
📊 शिक्षकों की मांगें
शिक्षकों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
✔️ TET के लिए अवकाश/समय सीमा में ढील
✔️ उत्तर प्रदेश के अनुभवी शिक्षकों को अनुपात में छूट
✔️ नई भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और त्वरित समाधान
✔️ ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के शिक्षकों के लिये विशेष रियायतें
उल्लेखनीय है कि कई शिक्षक ऐसे हैं जो वर्षों से पढ़ा रहे हैं, पर नौकरी में स्थिरता पाने के लिए नई नियमों से दबाव में हैं।
🧑💼 सरकारी रुख और प्रतिक्रिया
सरकार ने इस विषय पर कहा है कि TET की योग्यता को लागू करना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी शिक्षक मानकीकृत गुणवत्ता वाले हों।
हालांकि सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि शिक्षक संगठनों से संवाद जारी रखा जाएगा और उनका पक्ष सुना जाएगा।
अपना यह रुख स्पष्ट करते हुए अधिकारी बोले हैं कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार चाहती है, पर साथ ही यह भी जरूरी है कि नियम सबके लिये समान रूप से लागू हों।
🧠 JanDrishti विश्लेषण
यह मामला शिक्षक समुदाय की न्यायिक और रोजगार-संबंधी चिंताओं को दर्शाता है।
✔️ TET को शिक्षक भर्ती में अनिवार्य मानना शिक्षा की गुणवत्ता के लिये महत्वपूर्ण है
✔️ पर मार्च की चेतावनी यह दिखाती है कि शिक्षण समुदाय में असंतोष और भय भी मौजूद है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी विवादित नीतियों का समाधान संवाद, छूट और समयबद्ध प्रक्रिया के संयोजन से ही करना चाहिए, ताकि किसी भी तरह का शिक्षण समुदाय का भविष्य संकट में न पड़े।

