JanDrishti Breaking: लालू यादव को बड़ा झटका, ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में FIR रद्द करने की याचिका खारिज

SONU YADUVANSHI
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By JanDrishti Political Desk | March 25, 2026 | New Delhi

JanDrishti Breaking: लालू यादव को बड़ा झटका, ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में FIR रद्द करने की याचिका खारिज  By JanDrishti Political Desk | March 25, 2026 | New Delhi  राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land-for-Jobs) मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।  अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और इसे “मेरिट के बिना” मानते हुए खारिज किया जाता है।  ---  क्या है पूरा मामला?  यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर भर्ती के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई।  सीबीआई के अनुसार:  - नौकरी देने के बदले जमीन ट्रांसफर कराई गई - ये जमीनें लालू यादव के परिवार या करीबी लोगों के नाम पर ली गईं - कई नियुक्तियां बिना पारदर्शी प्रक्रिया के की गईं  इस मामले में लालू यादव के साथ उनकी पत्नी, बेटियां और अन्य लोग भी आरोपी बनाए गए हैं।  ---  अदालत में क्या दलील दी गई?  लालू यादव की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि:  - यह मामला उनके आधिकारिक कार्यकाल (रेल मंत्री) से जुड़ा है - इसलिए जांच से पहले Prevention of Corruption Act की धारा 17A के तहत सरकारी अनुमति जरूरी थी - बिना अनुमति के जांच और FIR अवैध है  साथ ही यह भी कहा गया कि FIR लगभग 14 साल बाद दर्ज की गई, जो न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है।  ---  कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?  दिल्ली हाई कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा:  - याचिका में कोई कानूनी दम नहीं है - इस स्तर पर जांच में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता - धारा 17A का तर्क इस मामले में लागू नहीं होता  इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को जांच जारी रखने की अनुमति दे दी।  ---  अब आगे क्या होगा?  - सीबीआई की जांच और कोर्ट की कार्यवाही जारी रहेगी - पहले से दाखिल चार्जशीट्स पर सुनवाई आगे बढ़ेगी - मामले में ट्रायल प्रक्रिया तेज हो सकती है  यह फैसला लालू यादव के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई को वैधता मिल गई है।  ---  राजनीतिक असर  इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव का मामला बता सकता है, जबकि जांच एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में पेश कर रही हैं।  ---  निष्कर्ष  दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब इस केस में आगे की सुनवाई और ट्रायल पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  ---  Tags: LaluYadav, LandForJobsCase, DelhiHighCourt, CBI, PoliticalNews, BreakingNews, JanDrishti

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land-for-Jobs) मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।

अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और इसे “मेरिट के बिना” मानते हुए खारिज किया जाता है।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर भर्ती के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई।

सीबीआई के अनुसार:

- नौकरी देने के बदले जमीन ट्रांसफर कराई गई
- ये जमीनें लालू यादव के परिवार या करीबी लोगों के नाम पर ली गईं
- कई नियुक्तियां बिना पारदर्शी प्रक्रिया के की गईं

इस मामले में लालू यादव के साथ उनकी पत्नी, बेटियां और अन्य लोग भी आरोपी बनाए गए हैं।

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अदालत में क्या दलील दी गई?

लालू यादव की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि:

- यह मामला उनके आधिकारिक कार्यकाल (रेल मंत्री) से जुड़ा है
- इसलिए जांच से पहले Prevention of Corruption Act की धारा 17A के तहत सरकारी अनुमति जरूरी थी
- बिना अनुमति के जांच और FIR अवैध है

साथ ही यह भी कहा गया कि FIR लगभग 14 साल बाद दर्ज की गई, जो न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

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कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

दिल्ली हाई कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा:

- याचिका में कोई कानूनी दम नहीं है
- इस स्तर पर जांच में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता
- धारा 17A का तर्क इस मामले में लागू नहीं होता

इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को जांच जारी रखने की अनुमति दे दी।

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अब आगे क्या होगा?

- सीबीआई की जांच और कोर्ट की कार्यवाही जारी रहेगी
- पहले से दाखिल चार्जशीट्स पर सुनवाई आगे बढ़ेगी
- मामले में ट्रायल प्रक्रिया तेज हो सकती है

यह फैसला लालू यादव के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई को वैधता मिल गई है।

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राजनीतिक असर

इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव का मामला बता सकता है, जबकि जांच एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में पेश कर रही हैं।

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निष्कर्ष

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब इस केस में आगे की सुनवाई और ट्रायल पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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