JanDrishti Desk | National News | March 27, 2026
नई दिल्ली: Supreme Court of India ने गुरुग्राम में चार साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म मामले में हरियाणा पुलिस की जांच पर कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को कम करके दिखाने पर सवाल उठाते हुए जांच अपने हाथ में लेते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया है।
पुलिस पर गंभीर आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हरियाणा पुलिस ने मामले की गंभीरता को कम करते हुए POCSO Act की धारा 10 के तहत मामला दर्ज किया, जबकि उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्य गंभीर यौन अपराध (Aggravated Penetrative Sexual Assault) की ओर संकेत करते थे।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में धारा 6 (Section 6 POCSO) लगाई जानी चाहिए थी, जो अधिक कठोर सजा का प्रावधान करती है।
“आरोपी को बचाने की कोशिश” – कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:
«पुलिस ने ऐसे प्रयास किए जो आरोपी के पक्ष में जाते दिखते हैं।
रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि धारा 6 के तहत अपराध बनता था, लेकिन अज्ञात कारणों से इसे कमजोर धारा में दर्ज किया गया।»
जांच अधिकारियों को हटाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए:
- गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को जांच से हटाने का आदेश दिया
- मामले के जांच अधिकारी (IO) को भी हटाया
- निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए SIT गठित की
POCSO कानून: क्या है अंतर?
- धारा 10 POCSO: अपेक्षाकृत कम गंभीर अपराध, कम सजा
- धारा 6 POCSO: गंभीर यौन शोषण (Aggravated assault), कठोर सजा (आजीवन कारावास तक)
मामले का प्रभाव
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि:
- बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता पर प्रश्न हैं
- जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है
- न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ा, जो सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है
JanDrishti Insight
गुरुग्राम का यह मामला भारत में बाल सुरक्षा कानूनों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप यह संकेत देता है कि यदि जांच एजेंसियां निष्पक्ष नहीं होंगी, तो न्यायपालिका को आगे आना पड़ेगा।
यह केस भविष्य में POCSO मामलों की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है — जहां “कमजोर धाराओं” का इस्तेमाल कर मामलों को दबाने की कोशिशों पर रोक लगेगी।

