1. ट्रंप का 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव: क्या है इसमें?
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान और तुर्की के माध्यम से तेहरान तक एक व्यापक शांति प्रस्ताव पहुँचाया है। इस प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं में शामिल हैं:
प्रतिबंधों में ढील: यदि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाता है, तो अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों में बड़ी रियायत दे सकता है।
मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण: ईरान को अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की सीमा तय करनी होगी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिए इस मार्ग को सुरक्षित और खुला रखने की गारंटी।
IAEA की निगरानी: ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा गहन जांच।
हालाँकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से इन वार्ताओं को नकार दिया है। ईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाकरी ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा, "क्या अमेरिका अब खुद से ही बातचीत कर रहा है? हम आप जैसे लोगों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे।"
2. सैन्य तैनाती: शांति के पीछे युद्ध की तैयारी?
एक तरफ ट्रंप शांति की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पेंटागन ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत को और बढ़ा दिया है।
82nd एयरबोर्न डिवीजन: अमेरिका ने लगभग 2,000 अतिरिक्त सैनिकों को क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया है। ये सैनिक किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत हमला करने में सक्षम हैं।
समुद्री घेराबंदी: अमेरिका के दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स (लगभग 5,000 मरीन) पहले से ही क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण 'खार्ग द्वीप' (Kharg Island) पर कब्जा करने की योजना बना सकता है, जो ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है।
3. इजरायल का 'सर्जिकल स्ट्राइक' और ईरान का पलटवार
इजरायल ने अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने हाल ही में ईरान के इस्फहान (Isfahan) में स्थित एक अंडरवॉटर रिसर्च सेंटर और सबमरीन डेवलपमेंट साइट को तबाह करने का दावा किया है। इजरायल का कहना है कि यह केंद्र ईरान की नौसैनिक ताकत का मुख्य आधार था।
जवाब में, ईरान ने अपनी 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' (Operation True Promise 4) की 80वीं लहर शुरू कर दी है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' (USS Abraham Lincoln) पर क्रूज मिसाइलें दागीं, जिससे उसे अपनी स्थिति बदलने पर मजबूर होना पड़ा।
4. वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल संकट
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक बाजारों पर दिख रहा है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव: ईरान ने कराची जा रहे एक मालवाहक जहाज को यह कहकर वापस भेज दिया कि उसके पास अनुमति नहीं थी। यह वैश्विक शिपिंग रूट पर ईरान के बढ़ते नियंत्रण का संकेत है।
शेयर बाजार और तेल: शांति प्रस्ताव की खबरों के बीच बुधवार को वैश्विक तेल कीमतों में 4% की गिरावट आई और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में भी राहत की लहर देखी गई, लेकिन यह स्थिरता अस्थायी हो सकती है।
5. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत का रुख
कुवैत और अन्य खाड़ी देशों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान की कार्रवाई को 'अस्तित्व के लिए खतरा' बताया है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इजरायल की आलोचना करते हुए कहा कि नेतन्याहू लेबनान में भी वही तबाही मचाना चाहते हैं जो उन्होंने गाज़ा में मचाई थी।
वहीं, भारत में भी इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने केंद्र सरकार की 'खामोशी' पर सवाल उठाए हैं, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र की सुरक्षा पर चर्चा की है।
जनदृष्टि का निष्कर्ष (Analysis)
डोनाल्ड ट्रंप का शांति प्रस्ताव संभवतः एक 'कूटनीतिक ढाल' है, ताकि वे अपनी सैन्य तैनाती को पूरा करने के लिए समय खरीद सकें। वहीं, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई अपने पिता (अली खामेनेई) की तुलना में अधिक आक्रामक रुख अपना रहे हैं। मिडिल ईस्ट अब उस मुकाम पर है जहाँ एक छोटी सी गलतफहमी पूरे विश्व को तीसरे विश्व युद्ध की ओर धकेल सकती है।
जनदृष्टि ब्यूरो निष्पक्ष खबर, सटीक विश्लेषण।

