जनदृष्टि एक्सक्लूसिव: "ट्रंप ने दो बार दिया धोखा", ईरान ने अमेरिका का शांति प्रस्ताव ठुकराया; कच्चे तेल की कीमतों में हलचल

SONU YADUVANSHI
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तेहरान/वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। ईरान ने अमेरिका की ओर से भेजे गए शांति वार्ता के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने अतीत में दो बार तेहरान को 'धोखा' दिया है।  पाकिस्तान के जरिए भेजा गया था प्रस्ताव अलजजीरा की रिपोर्ट और विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को सीजफायर और शांति वार्ता का एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। ईरान ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि अमेरिका की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। ईरान ने आरोप लगाया कि एक तरफ अमेरिका विनाश की धमकियां देता है और दूसरी तरफ अचानक शांति की बात करने लगता है, जो उसकी दोहरी नीति को दर्शाता है।  बाजार पर असर: तेल की कीमतों में गिरावट जैसे ही ट्रंप प्रशासन की ओर से सीजफायर की कोशिशों की खबरें वैश्विक स्तर पर फैलीं, बुधवार (25 मार्च 2026) को शेयर बाजारों में मामूली तेजी देखी गई। वहीं, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भी कुछ गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को उम्मीद थी कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू होती है, तो 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रहेंगे, जिससे तेल की सप्लाई चेन में सुधार होगा।  खामेनेई की चेतावनी: "मुद्दा सिर्फ युद्ध रोकने का नहीं" ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने ट्रंप प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अब मामला सिर्फ युद्ध रोकने तक सीमित नहीं रह गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपनी पुरानी गलतियों को नहीं सुधारता और प्रतिबंधों (Sanctions) पर अपना रुख स्पष्ट नहीं करता, तब तक कोई भी बातचीत संभव नहीं है।  ट्रंप की गिरती लोकप्रियता? युद्ध के इन हालातों के बीच अमेरिका से आ रहे सर्वे भी चौंकाने वाले हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ जारी इस तनाव के कारण डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई है। एक सर्वे के अनुसार, उनकी रेटिंग गिरकर 36 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो उनके कार्यकाल के सबसे निचले स्तरों में से एक है।  जनदृष्टि विश्लेषण (In-depth Analysis) ईरान का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका के बाहर निकलने और पिछले कार्यकाल के दौरान लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को अभी भूला नहीं है। पाकिस्तान की मध्यस्थता का विफल होना यह भी संकेत देता है कि दक्षिण एशिया के देशों के लिए इस संकट में पुल का काम करना कितना चुनौतीपूर्ण है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें फिर से आसमान छू सकती हैं।  बने रहें 'जनदृष्टि' के साथ, देश और दुनिया की हर बड़ी और सटीक खबर के लिए।
तेहरान/वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। ईरान ने अमेरिका की ओर से भेजे गए शांति वार्ता के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने अतीत में दो बार तेहरान को 'धोखा' दिया है।


पाकिस्तान के जरिए भेजा गया था प्रस्ताव अलजजीरा की रिपोर्ट और विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को सीजफायर और शांति वार्ता का एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। ईरान ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि अमेरिका की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। ईरान ने आरोप लगाया कि एक तरफ अमेरिका विनाश की धमकियां देता है और दूसरी तरफ अचानक शांति की बात करने लगता है, जो उसकी दोहरी नीति को दर्शाता है।


बाजार पर असर: तेल की कीमतों में गिरावट

जैसे ही ट्रंप प्रशासन की ओर से सीजफायर की कोशिशों की खबरें वैश्विक स्तर पर फैलीं, बुधवार (25 मार्च 2026) को शेयर बाजारों में मामूली तेजी देखी गई। वहीं, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भी कुछ गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को उम्मीद थी कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू होती है, तो 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रहेंगे, जिससे तेल की सप्लाई चेन में सुधार होगा।


खामेनेई की चेतावनी: "मुद्दा सिर्फ युद्ध रोकने का नहीं"

ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने ट्रंप प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अब मामला सिर्फ युद्ध रोकने तक सीमित नहीं रह गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपनी पुरानी गलतियों को नहीं सुधारता और प्रतिबंधों (Sanctions) पर अपना रुख स्पष्ट नहीं करता, तब तक कोई भी बातचीत संभव नहीं है।


ट्रंप की गिरती लोकप्रियता?

युद्ध के इन हालातों के बीच अमेरिका से आ रहे सर्वे भी चौंकाने वाले हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ जारी इस तनाव के कारण डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई है। एक सर्वे के अनुसार, उनकी रेटिंग गिरकर 36 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो उनके कार्यकाल के सबसे निचले स्तरों में से एक है।


जनदृष्टि विश्लेषण (In-depth Analysis)

ईरान का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका के बाहर निकलने और पिछले कार्यकाल के दौरान लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को अभी भूला नहीं है। पाकिस्तान की मध्यस्थता का विफल होना यह भी संकेत देता है कि दक्षिण एशिया के देशों के लिए इस संकट में पुल का काम करना कितना चुनौतीपूर्ण है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें फिर से आसमान छू सकती हैं।



बने रहें 'जनदृष्टि' के साथ, देश और दुनिया की हर बड़ी और सटीक खबर के लिए।

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